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प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानियां

Premchand Ki Lokpriya Kahaniyan

1- लाग-डाट2- रामलीला3- कजाक4- गरीब कΪ हाय5- परीक्षा6- क्रिकेट मैच7- पंच-परमेश्वर 8- धोखा9- भाड़ेका टट्टू10- जुगनूक की चमक11- सुजान भगत12- ईदगाह13- बेटों वाली विधवा Read Online

गोदान – पुस्तक-समीक्षा

godan - मुंशी प्रेमचंद

लेखक  - मुंशी प्रेमचंद  मुंशी प्रेमचंद का मूल नाम धनपतराय था। उनका जनम ३१ जुलाई, १८८0  में बनारस के लमही गाँव में हुआ। उनकी साहित्य-रचना में कुल ३२० कहानियाँ और १४ उपन्यास शुमार हैं। प्रेमचंद युग-प्रवर्तक लेखक थे। उपन्यास -सम्राट की उपाधि से सम्मानित प्रेमचंद के लेखन में शहरी, कस्बाई और ठेठ देहाती जीवन के सजीव चित्र मिलते हैं।  प्रेमचंद ने हिंदी साहित्य जगत को मंत्र, पूस की रात,...

गोदान(Godan) – भाग 6

godan - मुंशी प्रेमचंद

जेठ की उदास और गर्म सन्ध्या सेमरी की सड़कों और गलियों में पानी के छिड़काव से शीतल और प्रसन्न हो रही थी। मंडप के चारों तरफ़ फूलों और पौधों के गमले सजा दिये गये थे और बिजली के पंखे चल रहे थे। राय साहब अपने कारख़ाने में बिजली बनवा लेते थे। उनके सिपाही पीली वर्दियाँ डाटे, नीले साफ़े बाँधे,...

गोदान(Godan) – भाग 5

godan - मुंशी प्रेमचंद

उधर गोबर खाना खाकर अहिराने में पहुँचा। आज झुनिया से उसकी बहुत-सी बातें हुई थीं। जब वह गाय लेकर चला था, तो झुनिया आधे रास्ते तक उसके साथ आयी थी। गोबर अकेला गाय को कैसे ले जाता। अपरिचित व्यक्ति के साथ जाने में उसे आपत्ति होना स्वाभाविक था। कुछ दूर चलने के बाद झुनिया ने गोबर को मर्मभरी आँखों...

गोदान(Godan) – भाग 4

godan - मुंशी प्रेमचंद

होरी को रात भर नींद नहीं आयी। नीम के पेड़-तले अपनी बाँस की खाट पर पड़ा बार-बार तारों की ओर देखता था। गाय के लिए एक नाँद गाड़नी है। बैलों से अलग उसकी नाँद रहे तो अच्छा। अभी तो रात को बाहर ही रहेगी; लेकिन चौमासे में उसके लिए कोई दूसरी जगह ठीक करनी होगी। बाहर लोग नज़र लगा...

गोदान(Godan) – भाग 3

godan - मुंशी प्रेमचंद

होरी अपने गाँव के समीप पहुँचा, तो देखा, अभी तक गोबर खेत में ऊख गोड़ रहा है और दोनों लड़कियाँ भी उसके साथ काम कर रही हैं। लू चल रही थी, बगूले उठ रहे थे, भूतल धधक रहा था। जैसे प्रकृति ने वायु में आग घोल दिया हो। यह सब अभी तक खेत में क्यों हैं? क्या काम के...

गोदान(Godan) – भाग 2

godan - मुंशी प्रेमचंद

सेमरी और बेलारी दोनों अवध-प्रान्त के गाँव हैं। ज़िले का नाम बताने की कोई ज़रूरत नहीं। होरी बेलारी में रहता है, राय साहब अमरपाल सिंह सेमरी में। दोनों गाँवों में केवल पाँच मील का अन्तर है। पिछले सत्याग्रह-संग्राम में राय साहब ने बड़ा यश कमाया था। कौंसिल की मेम्बरी छोड़कर जेल चले गये थे। तब से उनके इलाक़े के...

गोदान(Godan) – भाग 1

godan - मुंशी प्रेमचंद

होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी देकर अपनी स्त्री धनिया से कहा -- गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। ज़रा मेरी लाठी दे दे। धनिया के दोनों हाथ गोबर से भरे थे। उपले पाथकर आयी थी। बोली -- अरे, कुछ रस-पानी तो कर लो। ऐसी जल्दी क्या है। होरी ने अपने झुरिर्यों से भरे हुए माथे...