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कभी होटल के कमरे साफ करते थे, आज दुनिया के अमीरों की लिस्ट में

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Micky Jagtiani

गरीबी की अंधेरी गलियों से निकलकर अरबपति बनने का सफर तय करने वाले मिकी जगतियानी भारत के रईसों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं। उनकी कुल संपत्ति 6.60 करोड़ डॉलर करीब 360 करोड़ रुपये आंकी गई है। वह दुबई की रिटेल चेन लैंडमार्क के मालिक हैं।। पहले मिकी भारत आना चाहते थे, लेकिन माता-पिता और भाई को में खोने के बाद उन्होंने बहरीन में महज 6 हजार डॉलर यानी करीब 4 लाख रुपये से अपना कारोबार जमाया।

कैसे भरोगे पेट’

मिकी की सफलता की कहानी लाजवाब है। उन्होंने 20 साल की उम्र में आजीविका चलाने के लिए संघर्ष किया, फिर उन्हें हालात से ऐसी प्रेरणा मिली कि वह बुलंदियों तक जा पहुंचे। मिकी के पिता के अंतिम शब्द थे, ‘मैं नहीं जानता मिकी, मेरे मरने के बाद अपना पेट कैसे भरोगे/ वह पेट भरने के लिए क्या करेगा, यह भी मैं नहीं जानता।’

होटेल के कमरे साफ किए

उनके पिता के पास उनकी चिंता का कारण भी था। वह एक अप्रवासी भारतीय परिवार से ताल्लुक रखते थे, जो कुवैत आया था। उन्होंने किसी तरह पैसे इकट्ठे कर 17 साल की उम्र में मिकी को अकाउंटिंग स्कूल में भेजा, लेकिन मिकी ने स्कूल में कुछ एग्जाम नहीं दिए। उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। पैसे कमाने के लिए उन्होंने बहरीन में होटेल के कमरे साफ किए, टैक्सी चलाई। दोबारा कुवैत लौटे, तो हालात मुश्किल हो गए। भाई की ल्यूकीमिया से मौत हो गई। माता-पिता भी जल्द चल बसे।

नहीं था कोई सहारा

21 साल की उम्र में मिकी का कोई परिवार नहीं था। बहरीन में अपने भाई की मौत होने का असर उन पर इतना गहरा हुआ कि उन्होंने बहरीन को ही अपना बिजनस अम्पायर बनाने का फैसला किया। 6 हजार डॉलर की पूंजी से उन्होंने बेबी शॉप खोली, जिसमें कपड़े स्ट्रॉलर और अन्य सामान थे। जगतियानी ने अपनी कंपनी में हजारों एशियाई अप्रवासियों को नौकरी दी है। आज लैंडमार्क कंपनी के खाड़ी देशों, भारत, पाकिस्तान, चीन और स्पेन में 6000 स्टोर हैं।

सादा जीवन

जगतियानी बिल्कुल सादा जीवन पसंद करते हैं। उनके पास सिर्फ एक कार है। दुबई में पत्नी के साथ रहते हैं। प्रेरणादायक फिल्में देखना पसंद करते हैं। वह कहते हैं, ‘मैं गांधी जी की तरह जिंदगी जीता हूं। मैं जमीन पर सोता हूं।’ जगतियानी कहते हैं कि भारत में अमीरों और गरीबों के बीच गहरी खाई है। उन्होंने कहा, ‘मैं मुंबई स्लम में गया, जहां बच्चे एक वक्त खाकर 11 घंटे पसीना बहाते हैं। मैं वहां गरीबी का मतलब समझने के लिए बैठ गया। यह क्या हो रहा है/ इसका क्या उपाय है।’

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